अहलेबैत समाचार एजेंसी अबना की रिपोर्ट के अनुसार इस्लामी लोकतांत्रिक ईरान के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मरज़िया अफ़ख़म ने दमिश्क के दक्षिण में स्थित फिलिस्तीनी शरणार्थी शिविर यरमूक को आतंकवादियों के हमलों का केंद्र बताते हुए इसकी उसकी बुरी स्थिति और उस पर तकफीरी आतंकवादियों के बर्बर हमलों पर चिंता जताते हुए कहा है कि यह दुखद स्थिति तीन साल पहले सशस्त्र समूहों के सीरिया में प्रवेश करने के समय से शुरू हुई है और अब आईएसआईएल के शामिल होने से और अधिक ख़राब हो गई है।
यरमूक शिविर पर आतंकवादी गुटों की कार्रवाई की निंदा करते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवादी तत्वों ने बहुत समय पहले से इस शिविर को युद्ध और रक्तपात के मैदान में बदल दिया है और फिलिस्तीनियों के खिलाफ आक्रामकता अंजाम दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उनके आक्रामक कार्यवाहियों के असली जिम्मेदार आतंकवादी गुट और वह देश हैं जो सीरिया के हवाले से अपनी गैर जिम्मेदाराना नीतियों का पालन करते हुए आतंकवादियों का समर्थन कर रहे हैं।
मरज़िया अफ़ख़म ने यरमूक शिविर के शरणार्थी फिलिस्तीनियों के साथ सहानुभूतिजताते हुए कहा कि वह फिलिस्तीनी शरणार्थी जिन्होंने ज़ायोनी सरकार के अत्याचार से तंग आकर सीरिया में शरण ली थी और वर्षों से सीरिया की सरकार और जनता उनकी मेजबानी करते रहे हैं आज तकफीरी आतंकवादियों की आक्रामकता की भेंट चढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इन तकफीरी आतंकवादी समूहों को इस्राईल का डायरेक्ट या इंडायरेक्ट समर्थन हासिल है क्योंकि यह तकफीरी तत्व ज़ायोनी सरकार के हितों को पूरा कर रहे हैं।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि उम्मीद है कि संयुक्त राष्ट्र इस मानव आस्दी को रोकने के लिए अपनी ज़िम्मेदारियों का पालन करेगा और आतंकवाद समर्थक देशों को आतंकवादियों का वित्तीय समर्थन बंद करने और सशस्त्र लोगों के सीरिया में प्रवेश करने के बारे में ठोस कदम उठाएगा।